Save the Environment

          मानव का पर्यावरणीय संबंध

पर्यावरण का महत्व :- पर्यावरण परी+आवरण से मिलकर बना है पर्यावरण का सीधा अर्थ  हमारे चारों ओर के आवरण को पर्यावरण कहते हैं इसमें जल,वायु,पृथ्वी, अग्नि आदि परमेश्वर प्रदत तत्व आते हैं  इस पर मानव का कोई नियंत्रण नहीं है अर्थात ये ईश्वरीय शक्ति द्वारा प्रदत तत्व हैं और ये तत्व मिलकर ही पर्यावरण का निर्माण करते हैं और इन तत्वों के बिना मानव प्रजाति का अस्तित्व ही नहीं रह सकता इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पर्यावरण का मानव जीवन में चोली दामन का साथ है

  

वर्तमान का पर्यावरण-:-

यह  कहने की आवश्यकता नहीं है कि वर्तमान का पर्यावरण बहुत ही दूषित हो रहा है पर्यावरण के साथ छेड़खानी करने के कारण ही मनुष्य को अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है जैसे अकाल,अतिवृष्टि,तूफान आदि प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ है इसके साथ ही पर्यावरण के जो तत्व है जल,वायु,भूमि यह इतने प्रदूषित हो गए हैं कि आज मानव प्रजाति का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है हमेशा रासायनिक पदार्थों के सेवन से हमारे खाद्य पदार्थ जहरीले बन रहे हैं और वाहनों से निकला हुआ धुआं वायुमंडल में छोड़ा जाता है जिससे सांस की कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है इसी प्रकार रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी अनुपजाऊ  होती जा रही है जिससे मनुष्य के सामने खाद्यान्न का संकट पैदा हो गया है



                पर्यावरण को खतरा :-
पर्यावरण को मुख्य खतरा किसी और से नहीं बल्कि मनुष्य से ही है मनुष्य का प्रकृति के साथ असंतुलित दोहन के कारण ही पर्यावरण के विभिन्न प्रदूषण होते जा रहे हैं उदाहरण के तौर पर पेड़ पौधों के संबंध में हम कह सकते हैं कि मनुष्य द्वारा अविवेकपूर्ण कटाई से हरियाली घट रही है जिसे वर्षा का अनियमतीकरण बढ़ रहा है इससे अनेक प्रकार की प्राकृतिक घटनाएं घटित हो रही है इसी प्रकार जल,वायु व ध्वनि प्रदूषण आदि  पर्यावरण के जो तत्व है वे भी प्रदूषित हो रहे हैं

             पर्यावरण का संरक्षण :-
हम सभी मिलकर पर्यावरण का संरक्षण कर सकते हैं इसके लिए पर्यावरण संरक्षण नीति का पालन करना होगा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना होगा और जितने पेड़ों की कटाई की जा रही है उससे 5 गुना अधिक पेड़ लगाने चाहिए कृषि करने का तरीका हमें पूर्ण रूप से बदलना होगा कृषि में जितने भी रासायनिक खादों और दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है उसको बंद करना होगा ये ही अनेक रोगों को निमंत्रण  देते हैं हमें पाश्चात्य जीवनशैली को छोड़कर पुरातन भारतीय संस्कृति को अपनाना होगा जिसमें पर्यावरण संरक्षण और सादा जीवन जीने पर जोर दिया गया है जो हमारी दिनचर्या के लिए अति आवश्यक है






पर्यावरण संरक्षण में आध्यात्मिकता का महत्व:- पर्यावरण को खतरा उत्पन्न होने का मुख्य कारण आध्यात्मिक ज्ञानहीनता ही है पुराने समय के हमारे पूर्वज परमात्मा से डरने वाले होते थे जिससे पर्यावरण का विवेकपूर्ण उपयोग करते थे और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते थे लेकिन वर्तमान में हमारी जीवन शैली और अध्यात्म बिल्कुल बदल गया है भगवान से मिलने वाला लाभ हमें नहीं मिला और हम नास्तिक होते गए इससे हमें इस बात की भूल  पड़ गई भगवान की जितनी वस्तुएं उपलब्ध है उनका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए इस प्रकार हम कह सकते हैं कि परमात्मा के प्रति आस्था और विश्वास पर्यावरण संरक्षण में महती भूमिका निभाता है हमारे सभी धर्म शास्त्र वेद,पुराण,गीता,कुरान,बाइबल सूक्ष्म वेद आदि के अनुसार इस पृथ्वी पर परमात्मा के अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं संतजी के प्रवचन हर रोज शाम 7:30 बजे  साधना चैनल पर सुने और आध्यात्मिकता का लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग प्रदान करें


वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण में सबसे अधिक योगदान  :-
वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण में सबसे अधिक योगदान जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं जो अपने अनमोल प्रवचन से अपने अनुयायियों को यह शिक्षा देते हैं कि पर्यावरण को शुद्ध रखेंगे तो यह हमारा स्वास्थ्य विकास करेगा और संत रामपाल जी महाराज जी की आध्यात्मिक प्रवचन में इतनी शक्ति होती है कि उनके पर वचनों के शब्द जहां जहां पड़ते हैं वहां दुष्ट शक्तियां पर्यावरण में स्थान नहीं बना पाती है और पर्यावरण हर तरह से शुद्ध होता है 
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