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Save the Environment

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          मानव का पर्यावरणीय संबंध पर्यावरण का महत्व :-  पर्यावरण परी+आवरण से मिलकर बना है पर्यावरण का सीधा अर्थ  हमारे चारों ओर के आवरण को पर्यावरण कहते हैं इसमें जल,वायु,पृथ्वी, अग्नि आदि परमेश्वर प्रदत तत्व आते हैं  इस पर मानव का कोई नियंत्रण नहीं है अर्थात ये ईश्वरीय शक्ति द्वारा प्रदत तत्व हैं और ये तत्व मिलकर ही पर्यावरण का निर्माण करते हैं और इन तत्वों के बिना मानव प्रजाति का अस्तित्व ही नहीं रह सकता इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पर्यावरण का मानव जीवन में चोली दामन का साथ है    वर्तमान का पर्यावरण-:- यह  कहने की आवश्यकता नहीं है कि वर्तमान का पर्यावरण बहुत ही दूषित हो रहा है पर्यावरण के साथ छेड़खानी करने के कारण ही मनुष्य को अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है जैसे अकाल,अतिवृष्टि,तूफान आदि प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ है इसके साथ ही पर्यावरण के जो तत्व है जल,वायु,भूमि यह इतने प्रदूषित हो गए हैं कि आज मानव प्रजाति का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है हमेशा रासायनिक पदार्थो...

नास्तिकता : कारण एवं समाधान

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नास्तिकता-:- गलत भक्ति के कारण नास्तिकता - इस विश्व के अधिकांश व्यक्ति यह मानते है कि इस सृष्टि को चलाने के लिए परम शक्ति(supreme god) अवश्य ही है इसलिए वे लोग उस परम शक्ति(supreme god) की खोज करने के लिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर में ढूंढते रहते हैं लेकिन यह परम शक्ति(supreme god) को पाने का साधन नहीं है अगर मंदिर,मस्जिद,गिरजाघर गुरुद्वारा,आदि में परम शक्ति होती तो इतनी छोटी होने के कारण उनका नाम परम (supreme god)  शक्ति कैसे पड़ता है और वह सृष्टि का संचालन कैसे करती है लेकिन वे लोग बिना सोचे ही धर्मगुरुओं के गलत मार्गदर्शन के कारण  जहां  (supreme god) को ढूंढना चाहिए वहां नहीं ढूंढ कर अनेक जगहों पर या अन्य माध्यमो से परमात्मा को (supreme god)  ढूंढते हैं जिससे प्रभु नहीं मिल पाए और धीरे-धीरे वे लोग नास्तिक होते गए नास्तिक होने का सबसे बड़ा कारण यही है कि परमात्मा (supreme god)  से मिलने वाला लाभ उनको नहीं मिले इससे वह प्रभु (supreme god) को भूल गए और यह मान लिया कि संसार या सृष्टि को चलाने वाली कोई सत्ता (supreme god)  नहीं है यह तो अपने...